आज जब देखता हूँ, चारों ओर, हर तरफ़ एक नया अहसास ही महसूस करता हूँ। सिर्फ़ एक बात ध्यान आती है जो कुछ भी हो सिर्फ़ मेरे लिए नया अनुभव ही तो है। वाकई कई बार ऐसे अवसर मिलते हैं जिनमे अपने आपको सहेजकर जीवन जीने में आसानी हॊती है।
ऐसा भी होता है जब चुनौतियां स्वीकार करते-करते मानसिकता में कुछ बदलाव आये,लेकिन यह स्वीकार्य है कि नये अनुभव के साथ ही कई चरण समूहों से गुजरने के बाद कुछ करने का दृढ़ विश्वास बनता है। अब सोचता हूं कि नया अहसास कब और कैसेे महसूस किया जाता है। वास्तव में अहसास का विकास चेतना तभी बनता है, जब साहस में दुस्साहस करने की वृति पारंगत बन जाए।
ऐसा भी होता है जब चुनौतियां स्वीकार करते-करते मानसिकता में कुछ बदलाव आये,लेकिन यह स्वीकार्य है कि नये अनुभव के साथ ही कई चरण समूहों से गुजरने के बाद कुछ करने का दृढ़ विश्वास बनता है। अब सोचता हूं कि नया अहसास कब और कैसेे महसूस किया जाता है। वास्तव में अहसास का विकास चेतना तभी बनता है, जब साहस में दुस्साहस करने की वृति पारंगत बन जाए।


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