Wednesday, July 23, 2025

कड़वी सच्‍चाई

कलयुग में हमारे सामने, आई जो कड़वी सच्चाई
बेटे की चाहत में जिन्‍‍‍होंने, बेटी को पलभर किया पराई
बेटी को हीन समझकर, इंसानियत भूल चुके वो लोग
बेटे का स्‍वार्थी प्रेम देख, हैवानियत के झूले झूल चुके वो लोग
बेटी क्‍‍‍या बनेगी बड़ी होकर, यह भी ना समझा भाई
क्‍‍या भ्रूण-हत्या महापाप कर, तुम्‍हें शर्म नहीं आई
शर्म क्या आतीं अब तो, दिल भी पत्थर बना लिया तुमने
यह पाप महागुनाह कर, बच्ची का भविष्य जो उजाड़ दिया तुमने
अब न देख पाएगी आने वाला पल, जिसे उसे अपना कल बनाना था
मिलकर अंजाम दिया जिन्होंने, सच! कार्य किया बड़ा घिनौना था
अब न देख पाएगी वो ममता का आंचल
जिसने उसे अनाथ किया
जरा रहम भी आया, उस मासूम अबला पर,
मर्जी को अपने कृतार्थ किया
यदि होता रहा बेटियों पर, यह निरंतर अत्याचार तो 
कैसे उज्जवल होगा, देश का भविष्‍य,
जरा सोचो भाईयों!
कुछ तो करो विचार
नहीं रोक पाएंगे उस बर्बादी को तब

क्‍योंकि लड़कियों की कमी हो रही समाज में, लड़के हैं आबादी पर अब
इसलिए हमें समाज में लड़कियों को, जीने का अधिकार दिलाना होगा
ताकि उज्जवल कर सकें, यह देश का भविष्य
साकार इसको बनाना होगा
संदीप कुमार, 9416964679

1 comments:

ni:shabd said...

hi,
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thnx,
tarun sharma

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