Wednesday, July 23, 2025

जीवन की सार्थकता

बदला लेकर बदलने वाले बदला नही जो तू
बदल जायेगा भविष्य तेरा दिल से सबके उतर जायेगा तू
कर होश संभल ऐसा न खुद अकेला जानकर
बढ़ चल आगे, राह है मुश्किल, बहता दरिया मानकर
जिल्लत भी मिली अगर, फखत ऐसा ना समझ
नुराए आसमान पर तैरती मिलेगी किस्मत तेरी
कर होश! संभल जा! विचार कर

एक जिद इतिहास तराशकर भविष्य में मिसाल बनने की
संकुचित आवश्यकताओं का दायरे बढ़ाने की
आओ आगे बढ़ चले, इसे पाकर ही हम संतुष्ट होंगे
लेकिन मतलब नही जीवन के लक्ष्य को दरकिनार करे
परिवर्तनशील समय के दायरे कायदा भी बनेगा प्राकृतिक
बुद्धि पर रहेगा किसी और का नियंत्रण, तब श्रेष्ठ अवस्था बनेगी सार्थकता
संदीप कु़मार, 9416964679

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